
Satya ke Prayog Athva Atmakatha By Mohandas Karamchand Gandhi
by Mahatma Gandhi
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About
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा रचित 'सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा' आधुनिक आत्मकथात्मक साहित्य की नींव रखने वाला एक अत्यंत प्रामाणिक, गहन और सुव्यवस्थित वैश्विक ग्रंथ है। गांधी जी की विशिष्ट विश्लेषणात्मक, पारदर्शी और अत्यंत सरल व सुबोध शैली में लिखी गई यह पुस्तक उनके बचपन से लेकर वर्ष १९२१ तक के आध्यात्मिक, नैतिक और राजनीतिक विकास का एक विस्तृत वैचारिक दस्तावेज़ प्रस्तुत करती है। इसके अंतर्गत उनके बचपन के प्रयोग, लंदन में छात्र जीवन, दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ संघर्ष, 'सत्याग्रह' और 'अहिंसा' के सिद्धांतों का जन्म तथा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके प्रारंभिक आंदोलनों जैसे सभी मुख्य पहलुओं को गहराई से कवर किया गया है। कालजयी विचारों, आत्म-परीक्षण और उच्च नैतिक सिद्धांतों से युक्त यह पुस्तक हिंदी साहित्य के प्रेमियों, शोधकर्ताओं, इतिहास के छात्रों और गांधीवादी दर्शन को करीब से समझने के लिए एक अनिवार्य संसाधन है।
Product Overview
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा रचित 'सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा' आधुनिक आत्मकथात्मक साहित्य की नींव रखने वाला एक अत्यंत प्रामाणिक, गहन और सुव्यवस्थित वैश्विक ग्रंथ है। गांधी जी की विशिष्ट विश्लेषणात्मक, पारदर्शी और अत्यंत सरल व सुबोध शैली में लिखी गई यह पुस्तक उनके बचपन से लेकर वर्ष १९२१ तक के आध्यात्मिक, नैतिक और राजनीतिक विकास का एक विस्तृत वैचारिक दस्तावेज़ प्रस्तुत करती है। इसके अंतर्गत उनके बचपन के प्रयोग, लंदन में छात्र जीवन, दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ संघर्ष, 'सत्याग्रह' और 'अहिंसा' के सिद्धांतों का जन्म तथा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके प्रारंभिक आंदोलनों जैसे सभी मुख्य पहलुओं को गहराई से कवर किया गया है। कालजयी विचारों, आत्म-परीक्षण और उच्च नैतिक सिद्धांतों से युक्त यह पुस्तक हिंदी साहित्य के प्रेमियों, शोधकर्ताओं, इतिहास के छात्रों और गांधीवादी दर्शन को करीब से समझने के लिए एक अनिवार्य संसाधन है।
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