Hindi Vyakaran By Kamta Prasad Guru
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हिंदी तथा अन्यान्य भाषाओं के व्याकरणों से उचित सहायता लेने पर भी इस पुस्तक में जो विचार प्रकट किए गए हैं और जो सिद्धांत निश्चित किए गए हैं, वे साहित्यिक हिंदी से ही संबंध रखते हैं। यहाँ यह कह देना अनुचित न होगा कि हिंदी व्याकरण की छोटी-मोटी कई पुस्तकें उपलब्ध होते हुए भी हिंदी में, इस समय अपने विषय और ढंग की यही एक व्यापक और संभवतः मौलिक पुस्तक है। इसमें प्रसिद्ध वैयाकरण श्री कामताप्रसाद गुरु का कई गं्रथों का अध्ययन और कई वर्षों का परिश्रम तथा विषय का अनुराग एवं स्वार्थत्याग सम्मिलित है। इस व्याकरण में अन्यान्य विशेषताओं के साथ-साथ एक बड़ी विशेषता यह भी है कि नियमों के स्पष्टीकरण के लिए इसमें जो उदाहरण दिए गए हैं, वे अधिकतर हिंदी के भिन्न-भिन्न कालों के प्रतिष्ठित और प्रामाणिक लेखकों के ग्रंथों से लिये गए हैं। इस विशेषता के कारण पुस्तक में यथासंभव अंधपरंपरा अथवा कृत्रिमता का दोष नहीं आने पाया है। अपने गुण-वैशिष्ट्य और प्रस्तुति के कारण हिंदी व्याकरण पर अब तक की सबसे प्रामाणिक और व्यावहारिक पुस्तक|
Product Overview
हिंदी तथा अन्यान्य भाषाओं के व्याकरणों से उचित सहायता लेने पर भी इस पुस्तक में जो विचार प्रकट किए गए हैं और जो सिद्धांत निश्चित किए गए हैं, वे साहित्यिक हिंदी से ही संबंध रखते हैं। यहाँ यह कह देना अनुचित न होगा कि हिंदी व्याकरण की छोटी-मोटी कई पुस्तकें उपलब्ध होते हुए भी हिंदी में, इस समय अपने विषय और ढंग की यही एक व्यापक और संभवतः मौलिक पुस्तक है। इसमें प्रसिद्ध वैयाकरण श्री कामताप्रसाद गुरु का कई गं्रथों का अध्ययन और कई वर्षों का परिश्रम तथा विषय का अनुराग एवं स्वार्थत्याग सम्मिलित है। इस व्याकरण में अन्यान्य विशेषताओं के साथ-साथ एक बड़ी विशेषता यह भी है कि नियमों के स्पष्टीकरण के लिए इसमें जो उदाहरण दिए गए हैं, वे अधिकतर हिंदी के भिन्न-भिन्न कालों के प्रतिष्ठित और प्रामाणिक लेखकों के ग्रंथों से लिये गए हैं। इस विशेषता के कारण पुस्तक में यथासंभव अंधपरंपरा अथवा कृत्रिमता का दोष नहीं आने पाया है। अपने गुण-वैशिष्ट्य और प्रस्तुति के कारण हिंदी व्याकरण पर अब तक की सबसे प्रामाणिक और व्यावहारिक पुस्तक|
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